शिक्षक की शिकायत पर 6 साल तक खामोशी, हाईकोर्ट ने मानवाधिकार आयोग से मांगा जवाब

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्राथमिक शिक्षक और उसके परिवार के कथित आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक उत्पीड़न के मामले में राज्य मानवाधिकार आयोग द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने पर कड़ा रुख अपनाया है। छह साल से लंबित शिकायत पर सुनवाई न होने और हाईकोर्ट के पूर्व आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने के मामले में कोर्ट ने राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया है। न्यायालय ने सचिव से चार सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है। मामले की अगली सुनवाई के लिए 18 सितंबर की तारीख तय की गई है।

यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की एकलपीठ ने राज्य मानवाधिकार आयोग के आदेश का अनुपालन नहीं किए जाने के खिलाफ दायर अवमानना याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया।

अवमानना याचिका में कहा गया है कि याचिकाकर्ता देव कुमार जैन राजकीय प्राथमिक विद्यालय पिण्डकी में सहायक अध्यापक एवं प्रभारी प्रधानाध्यापक के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने आंगनबाड़ी केंद्रों में पंजीकृत छात्र-छात्राओं के दाखिले में कथित डबलिंग, वित्तीय अनियमितताओं और छात्रवृत्ति से जुड़ी अनियमितताओं के संबंध में उच्च अधिकारियों को पत्राचार कर शिकायत की थी।

याचिका के अनुसार, मामले की जांच में शिकायतें सही पाए जाने के बावजूद संबंधित अधिकारियों ने कार्रवाई करने के बजाय विभागीय स्तर पर कथित साठगांठ करते हुए शिक्षक और उनके परिवार का आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक उत्पीड़न शुरू कर दिया। आरोप है कि इसी दौरान उनका वेतन भी रोक दिया गया।

शिक्षक ने कथित उत्पीड़न के खिलाफ वर्ष 2019 में राज्य मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि, शिकायत दर्ज होने के करीब छह वर्ष बाद भी आयोग की ओर से मामले का कोई प्रभावी निस्तारण नहीं किया गया।

लगातार सुनवाई नहीं होने पर याचिकाकर्ता ने फरवरी 2026 में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। उस समय हाईकोर्ट ने याचिका का निस्तारण करते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग को शिकायत पर दो माह के भीतर निर्णय लेने के निर्देश दिए थे।

याचिका में आरोप लगाया गया कि हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद निर्धारित दो माह की अवधि बीतने के बाद भी आयोग ने शिकायत पर कोई सुनवाई नहीं की। कई महीने गुजर जाने के बावजूद न तो शिकायत का निस्तारण किया गया और न ही हाईकोर्ट के आदेश का अनुपालन हुआ।

इसके बाद शिक्षक को दोबारा हाईकोर्ट की शरण लेते हुए अवमानना याचिका दाखिल करनी पड़ी। मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने आयोग की कार्यप्रणाली पर सख्ती दिखाते हुए राज्य मानवाधिकार आयोग के सचिव को अवमानना नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है। अब मामले की अगली सुनवाई 18 सितंबर को होगी।