
नैनीताल/हल्द्वानी। हल्द्वानी के रामलीला मैदान में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा के बाद हुए कथित ‘शुद्धिकरण’ मामले में नैनीताल हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। राज्य सरकार ने कोर्ट को बताया कि प्रकरण में दो एफआईआर दर्ज हैं। इनमें एक हल्द्वानी में और दूसरी मीडिया में प्रकाशित खबर के आधार पर बेंगलुरु में जीरो एफआईआर के रूप में दर्ज की गई है।
सरकार ने बताया कि बेंगलुरु में दर्ज जीरो एफआईआर को जांच के लिए हल्द्वानी ट्रांसफर किया जाएगा। साथ ही पुलिस की ओर से निष्पक्ष जांच करने और सीसीटीवी फुटेज समेत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने का आश्वासन दिया गया। सरकार के महाधिवक्ता के आश्वासन के बाद वरिष्ठ न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने याचिका निस्तारित कर दी।
देहरादून निवासी सामाजिक कार्यकर्ता बैजनाथ ने जनहित याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि सभा के बाद सार्वजनिक रूप से गंगाजल छिड़ककर और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ शुद्धिकरण करने से सामाजिक वैमनस्य की आशंका पैदा हुई। याचिका में घटना से जुड़े वीडियो, सीसीटीवी और अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने तथा निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की गई थी।
क्या है पूरा विवाद: 8 अगस्त को रामलीला मैदान में मल्लिकार्जुन खड़गे की जनसभा हुई थी। इसके तीन दिन बाद 11 अगस्त को श्री राम सेना धर्मार्थ सेवा न्यास ने वहां गंगाजल छिड़कने और हवन के जरिए कथित शुद्धिकरण किया था। घटना के बाद राजनीतिक विवाद बढ़ गया और मामला राज्यसभा तक पहुंचा।
इसके बाद बेंगलुरु में 4 सितंबर को आदिवासी कांग्रेस के पूर्व उपाध्यक्ष टीआर रामप्पा की शिकायत पर जीरो एफआईआर दर्ज की गई। अब इस मामले की जांच हल्द्वानी पुलिस द्वारा किए जाने की बात सरकार ने हाईकोर्ट में कही है।







