
उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में जिला पंचायत सदस्य कुंदन राम को तीसरी संतान से जुड़ी जानकारी छिपाने के मामले में दोषी पाए जाने के बाद पद से अयोग्य घोषित कर दिया गया है। प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र संख्या-4 असौं से निर्वाचित कुंदन राम की सदस्यता मुख्य विकास अधिकारी (CDO) आरसी तिवारी के आदेश पर तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।
यह मामला तब सामने आया जब स्थानीय निवासी भगवत सिंह डसीला ने शिकायत दर्ज कराई कि त्रिस्तरीय पंचायत सामान्य निर्वाचन-2025 के दौरान कुंदन राम ने अपनी तीसरी संतान की जानकारी छिपाई थी। बाद में महेंद्र प्रसाद और प्रमोद कुमार ने भी इसी संबंध में अलग-अलग शिकायतें दर्ज कराई थीं।
शिकायतों के आधार पर मामले की जांच पंचायतीराज निदेशालय तक पहुंची, जहां से स्पष्ट किया गया कि उत्तराखंड पंचायतीराज अधिनियम, 2016 की धारा-90(1)(द) के अनुसार दो से अधिक जीवित संतान होने पर कोई भी व्यक्ति जनप्रतिनिधि पद पर बने रहने के लिए अयोग्य होता है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति ने स्वास्थ्य विभाग सहित संबंधित सरकारी अभिलेखों की जांच कर विस्तृत रिपोर्ट तैयार की।
जांच में सामने आया कि कुंदन राम की पहली पुत्री अक्षिता का जन्म 25 नवंबर 2021, दूसरी पुत्री अर्पिता का जन्म 26 फरवरी 2023 और तीसरे संतान (पुत्र) अर्पित का जन्म 15 जुलाई 2025 को हुआ था। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि उनके तीन जीवित जैविक संतान हैं।
इन्हीं तथ्यों के आधार पर मुख्य विकास अधिकारी आरसी तिवारी ने आदेश जारी करते हुए कुंदन राम को जिला पंचायत सदस्य पद के लिए अयोग्य घोषित कर दिया और उनकी सदस्यता समाप्त कर दी।
हालांकि, आदेश में उन्हें कानूनी राहत का अवसर भी दिया गया है। यदि वह इस निर्णय से असंतुष्ट हैं, तो वे आदेश की तिथि से एक माह के भीतर कुमाऊं कमिश्नर के समक्ष अपील कर सकते हैं।







