
उत्तराखंड में चारधाम यात्रा के बीच मौसम एक बार फिर चुनौती बनकर सामने आया है। मौसम विभाग ने प्रदेश के कई पर्वतीय जिलों में अगले तीन से चार दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इनमें चारधाम यात्रा से जुड़े प्रमुख जिले उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और चमोली भी शामिल हैं। भारी बारिश के कारण यात्रा मार्गों पर भूस्खलन, मलबा आने और सड़कें बाधित होने की आशंका जताई गई है, जिससे श्रद्धालुओं की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
मौसम विभाग के अनुसार 23 जुलाई से बारिश की गतिविधियां तेज होंगी, जबकि 24 जुलाई से वर्षा का दौर और अधिक सक्रिय हो जाएगा। 25 और 26 जुलाई को कई जिलों में भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। मौसम वैज्ञानिक रोहित थपलियाल के अनुसार अगले चार से पांच दिन पर्वतीय क्षेत्रों के लिए बेहद संवेदनशील रहेंगे।
चारधाम यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को कई संवेदनशील और भूस्खलन प्रभावित मार्गों से होकर गुजरना पड़ता है। सामान्य बारिश के दौरान भी इन स्थानों पर मलबा और बोल्डर गिरने की घटनाएं सामने आती रहती हैं, जबकि भारी बारिश के दौरान जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन ने यात्रा मार्गों पर विशेष निगरानी बढ़ा दी है।
मौसम विभाग ने देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़, बागेश्वर और नैनीताल जिलों में भी भारी बारिश की संभावना जताई है। इन जिलों में जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी और अन्य मशीनरी तैनात करने, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी रखने तथा मौसम की स्थिति के अनुसार यात्रा संचालन को लेकर आवश्यक निर्णय लेने की तैयारी की जा रही है।
प्रशासन ने चारधाम यात्रियों से अपील की है कि वे यात्रा पर निकलने से पहले मौसम की ताजा जानकारी जरूर लें और प्रशासन द्वारा जारी एडवाइजरी का पालन करें। अधिकारियों का कहना है कि पहाड़ों में मौसम कभी भी तेजी से बदल सकता है, इसलिए सतर्कता ही सुरक्षित यात्रा की सबसे बड़ी कुंजी है।







