नाबालिग बेटी से दुष्कर्म प्रयास में पिता को 10 साल की सजा

उत्तराखंड के हरिद्वार के श्यामपुर क्षेत्र से सामने आए एक बेहद गंभीर और संवेदनशील मामले में फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने एक व्यक्ति को अपनी नाबालिग बेटी के साथ दुष्कर्म के प्रयास का दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है और स्पष्ट किया है कि जुर्माना न भरने की स्थिति में उसे एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।

मामला वर्ष 2022 से जुड़ा बताया गया है, जब पीड़िता अपने ही घर में लगातार असुरक्षित माहौल का सामना कर रही थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी के खिलाफ पहले से भी गंभीर आपराधिक मामले दर्ज रहे हैं, जिनमें हत्या और यौन हिंसा जैसे आरोप शामिल हैं। बताया जाता है कि वह पहले जेल में बंद था और लॉकडाउन अवधि के दौरान रिहा हुआ था।

रिहाई के बाद आरोपी पर आरोप है कि उसने अपने ही घर में अपनी 9 वर्षीय बेटी के साथ अनुचित व्यवहार शुरू किया और कई बार दुष्कर्म का प्रयास किया। पीड़िता की मां ने अदालत में दिए बयान में कहा कि बच्ची लंबे समय तक डर और दबाव में रही, लेकिन अंततः उसने हिम्मत जुटाकर पूरी बात अपनी मां को बताई। इस खुलासे के बाद परिवार में तनाव बढ़ गया और आरोपी ने विरोध करने पर पत्नी के साथ मारपीट और धमकियां भी दीं।

एक रात की घटना को मामले में निर्णायक माना गया, जब आरोपी ने कथित तौर पर फिर से बच्ची के साथ गलत हरकत करने की कोशिश की। उस समय घर में हंगामा हुआ और पीड़िता की मां ने किसी तरह बीच-बचाव कर बच्ची को सुरक्षित निकाला। इसके बाद मामले की शिकायत पुलिस को दी गई, जिसके आधार पर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में की गई, जहां अभियोजन पक्ष ने आठ गवाहों के बयान और अन्य साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा। वहीं बचाव पक्ष की ओर से भी दलीलें दी गईं, लेकिन अदालत ने उपलब्ध सबूतों को पर्याप्त मानते हुए आरोपी को दोषी करार दिया।

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि यह एक गंभीर प्रकृति का अपराध है, जिसमें पीड़िता की सुरक्षा और उसके बयान को महत्वपूर्ण आधार माना गया। इसी के साथ आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई गई। पुलिस और अभियोजन पक्ष के अनुसार, आरोपी का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है, जिससे यह मामला और अधिक गंभीर माना गया।